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आयुष मंत्रालय ने आयुर्वेद अस्पतालों को आयुष प्रारंभिक स्तर के एनएबीएच प्रमाणपत्र सौंपे|

आयुष मंत्रालय ने प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी के ‘हील इन इंडिया, हील बाई इंडिया’ के सपने को साकार करने और गुणवत्तापूर्ण या बेहतरीन आयुष सेवाएं आम जनता को सुलभ कराने के लिए एक बड़ा कदम उठाया है। आयुष सचिव पद्मश्री वैद्य राजेश कोटेचा ने पांच आयुर्वेद संस्थानों को प्रारंभिक स्तर के एनएबीएच प्रमाणपत्र प्रदान किए। 

ये प्रमाणपत्र ‘अस्पतालों और स्वास्थ्य सेवा प्रदाताओं के लिए राष्ट्रीय प्रत्यायन बोर्ड (एनएबीएच)’ द्वारा प्रदान किए गए, जो भारतीय गुणवत्ता परिषद का एक घटक बोर्ड है और जिसकी स्‍थापना स्वास्थ्य सेवा संगठनों के लिए प्रत्यायन कार्यक्रम शुरू करने एवं संचालित करने के उद्देश्‍य से की गई है। एनएबीएच के मुख्य कार्यकारी अधिकारी डॉ. अतुल मोहन कोचर सहित अन्य गणमान्यजन इस अवसर पर उपस्थित थे। 

इस अवसर पर कोटेचा ने कहा कि यह कार्यक्रम हमारे देश के सभी आयुर्वेद अस्पतालों एवं संस्थानों के लिए अत्यंत महत्वपूर्ण है। देश भर के आयुष डॉक्टरों को इसका लाभ उठाना चाहिए। उन्होंने कहा कि यह प्रमाणपत्र उच्‍च गुणवत्ता सुनिश्चित करने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम है। उन्होंने यह भी कहा, ‘हमें आयुष को पूरी दुनिया में इस तरह से फैलाने की जरूरत है जिससे कि आयुष से जुड़े सभी विषयों की व्‍यापक सराहना हो। मेरा विनम्र अनुरोध है कि सभी लोग इस सुविधा का लाभ उठाएं।’ 

ब्रह्म आयुर्वेद मल्टी स्पेशियलिटी हॉस्पिटल, गुजरात के प्रबंध निदेशक डॉ. नारायण जी शहाणे ने कहा, ‘जिस तरह से देश भर में आयुर्वेद और आयुष अस्पतालों की संख्या बढ़ रही है, यह प्रमाणपत्र समस्‍त अस्‍पतालों में उच्‍च गुणवत्ता सुनिश्चि͞त करने में काफी उपयोगी या प्रभावकारी साबित होगा। इसके साथ ही इससे दुनिया भर से उपचार के लिए यहां आने वाले लोगों का भरोसा भी बढ़ेगा।’

प्रारंभिक स्तर के एनएबीएच प्रमाणपत्र पेरुम्बयिल आयुर्वेदमना हॉस्पिटल, त्रिशूर (केरल); आरोग्य हेल्थकेयर प्राइवेट लिमिटेड, चेन्नई (तमिलनाडु);  प्रेमस्वरूप स्वामी आयुर्वेदिक मल्टी स्पेशियलिटी हॉस्पिटल, गांधीनगर (गुजरात); ब्रह्म आयुर्वेद मल्टी स्पेशियलिटी हॉस्पिटल, नाडियाड (गुजरात); और सुश्रुत आयुर्वेद हॉस्पिटल, पुत्तूर (कर्नाटक) को प्रदान किए गए।

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