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केंद्रीय सूचना एवं प्रसारण मंत्री अनुराग सिंह ठाकुर ने दुनिया की सबसे बड़ी फिल्म संरक्षण परियोजना की घोषणा की।

केंद्रीय सूचना एवं प्रसारण मंत्री अनुराग सिंह ठाकुर ने राष्ट्रीय फिल्म विरासत मिशन (एनएफएचएम) के तहत दुनिया की सबसे बड़ी फिल्म संरक्षण परियोजना की घोषणा की है। मंत्रालय ने इसके लिए 4 मई 2022 को 363 करो़ड़ रुपये का बजट प्रदान किया है। भारतीय राष्ट्रीय फिल्म अभिलेखागार में यह पुनरुद्धार परियोजना अब जोर-शोर से शुरू होने वाली है। केंद्रीय मंत्री संगठन की समीक्षा बैठक में भाग लेने के लिए पुणे आए थे।

राष्ट्रीय फिल्म विरासत मिशन के तहत, लगभग 2200 फिल्मों का पुनरुद्धार किया जाएगा। फिल्म निर्माताओं, वृत्तचित्र फिल्म निर्माताओं, फिल्म इतिहासकारों, निर्माताओं आदि की भाषावार समितियों ने संरक्षण के लिए फिल्मों का चयन किया है। अपर्णा सेन, श्रीराम राघवन, अंजलि मेनन और वेत्रिमारन जैसी प्रख्यात फिल्मी हस्तियां इन समितियों का हिस्सा थीं।

मंत्री ने कहा, ‘राष्ट्रीय फिल्म विरासत मिशन में पुनरुद्धार के अलावा 597 करोड़ रुपये के कुल आवंटित बजट में फिल्म की स्थिति का मूल्यांकन, निवारक संरक्षण और डिजिटलीकरण की चल रही संरक्षण प्रक्रियाएं भी शामिल हैं, जो दुनिया के सबसे बड़े फिल्म संरक्षण मिशन में से एक है।’

भारतीय सिनेमा, जो अब सौ से अधिक वर्षों से अस्तित्व में है, विश्व सिनेमा के समूह में एक बहुत ही अनूठा स्थान रखता है। भारतीय फिल्मों के पुनरुद्धार से एक बार फिर वर्तमान और भविष्य की पीढ़ियों को इन बेहतरीन फिल्मों को देखने का मौका मिलेगा, जिसके दर्शक दशकों से दीवाने हैं।

इस बीच, एनएफएआई ने सत्यजीत रे की 10 प्रतिष्ठित फिल्मों का संरक्षण कार्य पूरा किया है, जिन्हें आगे विभिन्न अंतरराष्ट्रीय फिल्म समारोहों में प्रदर्शित किया जाएगा। इनमें से रे की फिल्म ‘प्रतिद्वंदी’ को कान्स ने 2022 संस्करण के कान्स क्लासिक्स सेक्शन में प्रीमियर के लिए चुना है। 1978 में आई जी. अरविंदन की मलयालम फिल्म ‘थम्पी’ के संरक्षित किए गए संस्करण को फिल्म हेरिटेज फाउंडेशन द्वारा कान महोत्सव में रेस्टोरेशन वर्ल्ड प्रीमियर में प्रदर्शित किया जाएगा।

सत्यजीत रे की फिल्मों के अलावा, ‘नीलकुयिल’ (मलयालम) और ‘दो आखें बारह हाथ’ (हिंदी) जैसी विविध फीचर फिल्मों को भी कवर किया जाएगा। एनएफएआई, फिल्म प्रभाग और अन्य दुर्लभ सामग्रियों के संग्रह से अत्यंत महत्वपूर्ण लघु और वृत्तचित्र जिसमें स्वतंत्रता से पहले की तस्वीरें भी शामिल हैं, उन्हें संरक्षित किया जाएगा क्योंकि वे भारत की विकास गाथा को दिखाती हैं।

पुनरुद्धार प्रक्रिया

इस प्रक्रिया में सर्वश्रेष्ठ उपलब्ध स्रोत सामग्री से फ्रेम-टू-फ्रेम डिजिटल और सेमी-ऑटोमेटेड मैनुअल पिक्चर और ध्वनि बहाली की जाती है। सोर्स निगेटिव/प्रिंट को 4K से .dpx फाइलों पर स्कैन किया जाएगा जिसे बाद में डिजिटल तरीके से संरक्षित किया जाएगा। मरम्मत प्रक्रिया के दौरान हर फ्रेम में खरोंच, गंदगी सहित नुकसान को दुरुस्त किया जाएगा। पिक्चर बहाली प्रक्रिया की तरह ही ध्वनि को भी संरक्षित किया जाएगा। साउंड निगेटिव पर गैरजरूरी आवाजें, विकृति आदि को डिजिटल रूप से हटाया जाएगा। मरम्मत कार्य के बाद, डिजिटल पिक्चर फाइलें कलर ग्रेडेड (डीआई प्रक्रिया) और संतुलित रहेंगी, जिससे रिलीज के समय फिल्म का मूल रूप हासिल किया जा सके।

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